इम्युनिटी क्या है? जानिए आयुर्वेद से

जरा सोचिये क्या होगा अगर शरीर में एक विशेष पदार्थ हो जो उम्र बढ़ने से रोके, व्याधीप्रतिरक्षा बढ़ाये, उज्ज्वल त्वचा, ताक़त, अच्छा मूड, सुखद नींद, मजबूत पाचन, आध्यात्मिकता और शारीरिक शक्ति को नियंत्रित करता हो? ……………………………………………

आयुर्वेद के अनुसार है। ओज

इस पदार्थ को ओजस (OH-jas) कहा जाता है। संस्कृत में, ओजस के दो प्रमुख अर्थ हैं।

१. शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन शक्ति के संदर्भ में, ओजस का अर्थ है “शक्ति।”

२.आध्यात्मिक और भावनात्मक भलाई के संदर्भ में, इसे “चेतना की शारीरिक अभिव्यक्ति” कहा जाता है।

ओजस अन्नपाचन का अंतिम सर्वोतम अंश माना जाता है। इसका मतलब यह है कि भोजन के पूर्ण पाचन में लगभग 24 घंटे लगते हैं, लेकिन शरीर को भोजन पचाने और इसे परिष्कृत करने के लिए पर्याप्त तीस दिन लगते हैं।

दुर्भाग्य से, इन तीस दिनों के दौरान, कई कारक इसके उत्पादन से समझौता कर सकते हैं, और कई लोगों ने ओजस को कम कर दिया है और उनमें इच्छा शक्ति, प्रतिरक्षा, तेज चमक और दीर्घायु की कमी होती है।

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ओजस क्या हे और शरीर में कहा होता हे,

आयुर्वेद के चरक आचार्य के अनुसार, ओज का रूप रस गंध तक का वर्णन किया गया है जो बिना माइक्रोस्कोप का अविष्कार किये इतना सटीक वर्णन लक्षण के साथ मिलता हे जो अद्बुध हे

ओज जो दिल में बसता है और मुख्य रूप से सफेद, पीला और लाल रंग का होता है, उसे शरीर का ओजस कहा जाता है:

यदि ओजस नष्ट हो गया, तो मनुष्य भी नष्ट हो जाएगा। मनुष्य के शरीर में जिस रूप में पहली बार ओजस उत्पन्न होता है, उसमें घी का रंग होता है; तले हुए धान (लाज़ा) के शहद और गंध का स्वाद।

immunity like honey bee
ojas honey is like honey bee collecting honey from the flower

चूंकि मधुमक्खियां फलों और फूलों से शहद इकट्ठा करती हैं, इसलिए शरीर में ओजस को मनुष्य के कार्यों, गुणों, आदतों और आहार द्वारा एकत्र किया जाता है।

Reference: Charaka Samhita Sutrasthana 17/76 

मॉडर्न साइंस अभी भी शरीर की इम्युनिटी व्याधी प्रतिरक्षा की कार्य प्रणालियो को नहीं समज पाया,

आयुर्वेद के अनुसार, ओजस  व्याधी प्रतिरक्षा, एंडोक्रिनोलॉजी (हार्मोन), नुरोलोगिकल तंत्रिका,पाचन तंत्र और मनोविज्ञान को नियंत्रित करते हैं।

वेस्टर्न वर्ल्ड में, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में डॉ.कैंडिस पर्ट, पीएचडी द्वारा अत्याधुनिक शोध में पाया गया कि कुछ पेप्टाइड्स को न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में भी जाना जाता है जो व्याधी प्रतिरक्षा, एंडोक्रिनोलॉजी अंतःस्रावी और नुरोलोगिकल तंत्रिका तंत्र और भावनाओं के वाहक के रूप में कार्य करते हैं। इन पेप्टाइड्स को आयुर्वेद के ओजस की अवधारणा की तरह कार्य करता है (1)।

 

ओजो क्षय लक्ष्ण कैसे पहचाने

ओजो क्षय लक्षण – घटे हुए ओजस के लक्षण व्याधी(प्रतिरक्षा) immunity के साथ साथ अन्य लक्षण भी  दिखाते है जो मन, त्वचा, शारीरक बल और इन्द्रिय से जुड़े होते है

१.भया – डर बीमारीका, सभी प्रकार के फोबिया डर ,

२.दुर्बाला – निरंतर कमजोरी,

३.ध्यानायती – चिंता, घर की, काम की,बीमारी की

४.व्यथिता इंद्रिया – शरीर में दर्द के साथ इद्रिय जैसे आंख,नाक ,कान की बीमारिया

५.दुश्चाया  – त्वचा के निखार का खोना ,

६.दुरमाना  – बेचैन रेहना, मन उदास रेहना

७.रुक्ष – शरीर में सूखापन, खुरदरापन और

८.क्षम – शरीर में बल ,वजन और धातु में क्षीणता।

 

धातु (ऊतकों) और ओजस के क्षय के कारण को जाने

व्यायामोऽनशनंचिन्तारूक्षाल्पप्रमिताशनम्|
वातातपौभयंशोकोरूक्षपानंप्रजागरः||७६||
कफशोणितशुक्राणांमलानांचातिवर्तनम्|
कालोभूतोपघातश्चज्ञातव्याःक्षयहेतवः||७७||

 

१.व्यायाम – अत्यधिक शारीरिक गतिविधियाँ, बहुत अधिक व्यायाम करना

२.अनशन – उपवास, लंबे समय तक उपवास करना

३.चिन्ता – चिंता, अत्यधिक सोच, क्रोध, भूख से ओजस की मात्रा कम हो जाती, चिंता, शोक, परिश्रम

३.रुक्ष, अल्पा, प्रमिता आसन – सूखे भोजन का सेवन, कम मात्रा में भोजन या भोजन का अभ्यस्त भोजन जिसका कोई स्वाद न हो, कम मात्रा में भोजन करना, अच्छे और बुरे खाद्य पदार्थों के मिश्रण का सेवन,

 

४.वात, अताप – वायु और सूर्य के संपर्क में ज्यादा रेहना

५.भया – डर, मानसिक व्याधी जैसे फोबिआस

६.शोका – दु: ख, मानसिकव्याधी,डिप्रेशन,

७. रुक्ष पान – सूखे पेय का सेवन, मादक पेय पदार्थों का सेवन जो सूखापन का कारण बनता है,

८. प्रजागरण – रात्रि जागरण, रात को जागना, रात की नींद को छोड़ना,

९. कफ, रक्त, वीर्य और अन्य मलमूत्र अधिक मात्र में शरीर से निकलना,

उदहारण के तोर पर

वीर्य का अधिक व्यय , एक दिन में एक या कई बार संभोग करने से,

कफ बार बार थुखने से ,

मूत्र diuretic मेडिसिन रोज लेना, जो ब्लड pressure की दवाई हे,पेट साफ करने के लिए रोज विरेचक दवाई लेना .

१०. वृद्धावस्था और आदन काल (मई से अक्टूबर तक) में ओज कम हो जाता हैं

११. भूता (रोगाणुओं)बैक्टीरिया वायरस जैसे कोरोनो का अत्यधिक उन्मूलन। जहर का सेवन।

 

सरांस यह हे की आयुर्वेद के अनुसार, तनाव और अत्यधिक धातु की  गतिविधि ओजस को कम कर देती है।

यह और भी समझ में आता है जब हम हाल ही में डॉ गर्सन द्वारा किए गए शोध पर विचार करते हैं। गर्सन ने अपनी पुस्तक द सेकंड ब्रेन में इस बात की पुष्टि की कि मनुष्य पाचन तंत्र के माध्यम से अपने तनाव को सुलझाता है।

याद रखें, ओजस पाचन का सबसे परिष्कृत उत्पाद है। वास्तव में, शरीर के सेरोटोनिन का 95% हिस्सा और सामान्य रूप से इसके न्यूरोट्रांसमीटर का अधिकांश हिस्सा आंत (2) में निर्मित और संग्रहीत होता है।

लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि यह तनाव और “ओजस” और न्यूरो-पेप्टाइड्स का उत्पादन पाचन (2) की दक्षता पर निर्भर है।

 

अत्यधिक सेक्स: और ओज , चूंकि सर्वोच्च ओजस बनने से पहले प्रजनन द्रव के रूप में  होता है, इसलिए प्रजनन द्रव सभी संचित सर्वोच्च ओजस को हृदय में संचित होने के लिए तैयार करता है।  अत्यधिक सेक्स शुक्राणु और डिंब दोनों के साथ-साथ दिल में प्रवेश करने वाले ओजस को भी लूट सकता है, और यहां तक ​​कि दिल में ओजस के भंडार को कम कर सकता है। एक दिन में एक या कई बार संभोग करने से या समय की विस्तारित अवधि के लिए रोजाना सेक्स करना ओजस भंडार (रिजर्व) को खत्म कर देगा। ”

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